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gadya saar : गद्य सार

संस्कृत के गद्य कवियों और गद्य काव्य के बारे में सब कुछ

इस टेबल में आपको संस्कृत के प्रमुख गद्य कवियों और उनके काव्य के बारे में संपूर्ण जानकारी एक साथ दी गई है। आप इस टेबल को डाउनलोड कर प्रिंट लेकर आराम से पढ़ सकते हैं। 

सभी कवियों और काव्यों को एक साथ पढक़र याद करना आसान होगा और आप इसे एग्जाम से ठीक पहले यदि देखकर जाएंगे तो और भी अधिक उपयोगी साबित होगी।

                                                                                                                                             सार               दशकुमारचरित वासवदत्ता कादम्बरी हर्षचरित शिवराजविजय


काव्य विधा आख्यायिका          कथा             कथा        आख्यायिका उपन्यास
विभाजन         तीन भाग                  -                     तीन भाग 8 उच्छवास 12 नि:श्वास
लेखक         दंडी                        सुबन्धु             बाणभट्ट बाणभट्ट अम्बिकादत्त व्यास
समय         600-700 ई       600-700 ई             606-648 ई 606-648 ई 1858-1900 ई
उपजीव्य         बृहतकथा                कल्पित             बृहतकथा ख्यातवृत           ख्यातवृत
नायक         दशकुमार                कंदर्पकेतु             चंद्रपीड          हर्षवद्र्धन   शिवाजी
नायिका         नहीं है                वासवदत्ता     कादम्बरी  कोई नहीं           कोई नहीं
मुख्यरस         अद्भुद्                शृंगार             शान्त         वीर वीर
रीति                 वैदर्भी                गौड़ी                     पांचाली         पांचाली             वैदर्भी व गौडी

Vedic literature split : वैदिक साहित्य का विभाजन

Vedic literature split : वैदिक साहित्य का विभाजन

Important questions for Sanskrit TGT, PGT, PRT, REET, CTET, UPTET, HTET, RPSC, NET, SLAT, UPSC, UPPSC, NET, SLAT,IAS, IAS, RAS, SSC. Exams.

वैदिक साहित्य को चार भागों में बांटा गया है।

वेदों की संहिताएं
ब्राह्मण ग्रंथ
आरण्यक ग्रंथ
उपनिषद

वेद चार हैं

ऋगवेद
यजुर्वेद
सामवेद
अथर्ववेद

-संहिता भाग में मंत्रों का शुद्ध रूप रहता है।
-ब्राह्मण ग्रंथां में वह भाग है जो मंत्रों के विधि भाग की व्याख्या करता है।
-आरण्यक ग्रंथों में वह अंश है जिन विधियों को वानप्रस्थ की अवस्था में मनुष्य को वन में करना चाहिए।
-उपनिषदों में आध्यात्मिक और दार्शनिक सिद्धान्त हैं।

वैदिक छंद

वेदों में प्रमुख रूप से १४ छंदों का उपयोग किया गया है। इनमें भी सात ही प्रमुख हैं।
वेदों में वर्णवृत छंदों का प्रयोग किया गया है मात्रिक छंदों का नहीं।
-वेदों में गायत्री छंद सर्वाधिक प्रचलित मालूम होता है।
-गायत्री के बाद त्रिष्टुप छंद का प्रयोग अधिक हुआ है। यानि यह दूसरे नंबर पर है।
-तीसरे नंबर पर जगति छंद का प्रयोग वेदों में किया गया है।

वेदों में प्रयुक्तप्रमुख सात छंद

गायत्री
उष्णिक
अनुष्टुप
बृहती
पंक्ति
त्रिष्टुप
जगती

अष्ट विकृतियां:-

 वेद के मंत्रों के उच्चारण में और उनकी सुरक्षा में कोई अंतर या कमी नहीं रह जाए इसके लिए कुछ उपाय किए गए थे। इन उपयों को ही विकृतियां कहते हैं।

-विकृतियां कुल आठ हैं। 

जटा पाठ
माला
शिखा
रेखा
ध्वज
दंड
रथ
घन
-इनमें घन पाठ सबसे अधिक बड़ा और कठिन है।

वेदों की सुरक्षा के लिए पांच उपाय

वेदों की सुरक्षा में पांच उपाय किए गए थे। इन्हें पांच प्रकार कहते हैं।
संहिता पाठ:- इसमें मंत्र शुद्ध रूप में रहते थे।
जैसे :- कखग
पद पाठ:- इसमें प्रत्येक पद को पृथक कर के पढ़ा जाता था।
जैसे :- क, ख, ग
क्रम पाठ:- यह क्रम अनुसार होता है।
जैसे:- कख, खग, गघ ।
जटापाठ:- इसका रूप इस प्रकार होगा।
जैसे:- कख, खक, कख, खग, गख, खग ।
घन पाठ:- इसमें रूप इस प्रकार होगा।
जैसे:- कख, ाक, कखग, गखक, कखग ।

ऋग्वेद

-ऋक या ऋच् का अर्थ है स्तुति परक मंत्र ।
-संहिता शब्द संकलन या फिर संग्रह का बोधक है।
-ऋग्वेद की शाकल शाखा की संहिता ही प्राप्त होती है।

ऋग्वेद का विभाजन

ऋग्वेद का विभाजन दो प्रकार से किया गया है।
मंडल क्रम:- मंडल, अनुवाक, सूक्त और मंत्र
अष्टक क्रम:- अष्टक, अध्याय, वर्ग और मंत्र
-इनमें मंडल क्रम अधिक उपयुक्त और प्रचलित है और इसमें देवताओं के अनुसार सूक्तों का विभाजन दिया गया है।
-अष्टक क्रम में संख्या और गणनाएं अधिक हैं। ऋग्वेद को समान आठ भागों में बांटा गया है। इसे ही अष्टक क्रम कहते हैं।
-प्रत्येक अष्टक के आठ अध्याय हैं। यानि 8गुणा8 ।
-यानि पूरे ऋग्वेद में 64 अध्याय हैं।
-प्रत्येक अध्याय को वर्गों में बांटा गया है और यह संख्या प्रत्येक अध्याय में भिन्न है। जो कि 25 से ल ेकर 49 तक है।
-प्रत्येक वर्ग में मंत्रों की संख्या 5 है।
-अष्टकों में अध्यायों की संख्या भी भिन्न है। वह 22े1लेकर 331 है।
-इस प्रकार ऋग्वेद में 8 अष्टक, 64 अध्याय, 2024 वर्ग और 10552 मंत्रों की संख्या है।

मंडल क्रम के अनुसार

-मंडल क्रम में देवताओं के अनुसार ऋग्वेद को 10 मंडलों, 85अनुवाक, 1028 सूक्त और 10552 मंत्रों में विभाजित किया गया है।
-इसमें 11 बालाखिल्य सूक्त और इनके 80 मंत्र हैं। वे भी इसी में शामिल हैं।
-

मंडल         सूक्त       मंत्र संख्या           ऋषि

1                  191             2006                   मधुच्छन्दा, मेधातिथि, दीर्घतमा, अगस्तय आदि
2                  43               429                       गृत्समद एवं वंशज
3                  62               617                       विश्वमित्र
4                  58               589                       वामदेव
5                  87               727                       अत्रि
6                  75              765                       भारद्वाज एवं वंशज
7                  104             841                       वशिष्ठ
8                  103             1716                    कण्व, भृगु, अंगिरस आदि
9                  114             1908                    सोम, पवमान
10                161             1754                    त्रित, विभद, इन्द्र, श्रद्धा, कामायनी आदि

ऋग्वेद में महिला ऋषिकाओं की संख्या

-ऋग्वेद में महिला ऋषिकाओं की संख्या 21 बताई गई है।
-इन ऋषिकाओं द्वारा दृष्ट मंत्रों का संकलन दशम मंडल में है।

-: महिला ऋषिकाओं के नाम :-


1 श्रद्धा कामायनी
2 शची पौलमी
3 सार्पराज्ञी
4 यमी वैवस्वती
5 देवजामय: दन्द्रमातर:
6 इन्द्राणी
7 शश्वती आंगिरसी
8 रामेशा ब्रहावादिनी
9 गोधा ऋषिका
10 उर्वशी
11 सूर्या सावित्री
12 अदिति दाक्षायणी
13 घोषा काक्षीवती
14 अपाला आत्रेयी
15 नदी ऋषिका
16 लोपामुद्रा
17 विश्ववारा आत्रेयी
18 वाक आम्भृणी
19 जुहु: बह्मजाया
20 सरमा ऋषिका
21 यमी

Current issues nov 2017 : ICMM World Congress सैन्य चिकित्सा पर 42वीं आईसीएमएम वर्ल्ड कांंग्रेस

Current issues nov 2017 : ICMM World Congress :

Important questions for Sanskrit TGT, PGT, PRT, REET, CTET, UPTET, HTET, RPSC, NET, SLAT, UPSC, UPPSC, NET, SLAT,IAS, IAS, RAS, SSC. Exams.


सैन्य चिकित्सा पर 42वीं आईसीएमएम वल्र्ड कांंग्रेस का उद्घाटन

रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के तत्वावधान में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) द्वारा इंटरनेशनल कमेटी ऑफ मिलट्री मेडिसन (आईसीएमएम) का 42वां विश्व सम्मलेन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 75 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का विषय "मिलिट्री मेडिसन इन ट्रांजिशन: लुकिंग अहेड" है। सम्मेलन में भूखंड विशेषीकृत सैन्य चिकित्सा सहयोग सहित कई मुद्दों पर विचार विमर्श होगा। युद्ध में महिला, चिकित्सा विकलांगता लाभ, पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य और नये रंगरूटों की स्वास्थ्य जांच आदि पर सामूहिक परिचर्चा होगी।

प्रो. क्वारराइशा अब्दुल करीम :-

भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी एड्स अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर क्वारराइशा अब्दुल करीम को एचआईवी और किशोरों के लिए यूएनएड्स का विशेष राजदूत नियुक्त किया गया है। पिछले महीने अब्दुल करीम और उनके पति प्रोफेसर सलीम अब्दुल करीम को अमेरिका की इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन विरोलॉजी (आईएचवी) से प्रतिष्ठित लाइव टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा था।

भारत का विश्व बैंक से सोलर समझौता

सोलर पार्क परियोजना के लिए साझा बुनियादी ढांचा के लिए 98 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आईबीआरडी/सीटीएफ ऋण के लिए एक गारंटी समझौते और 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लिए अनुदान समझौते पर विश्व बैंक के साथ हस्ताक्षर किए गए हैं।
प्रमुख रूप से इस परियोजना में ये दो घटक है
(१) सोलर पार्कों के लिए साझा बुनियादी ढांचा (75 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आईबीआरडी ऋण और 23 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सीटीएफ ऋण सहित 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अनुमानित कुल परियोजना लागत)
(२) तकनीकी सहायता (सीटीएफ अनुदान के रूप में 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर)।

समझौते के उद्देश्य

इस परियोजना का उद्देश्य देश में बड़े सोलर पार्कों की स्थापना के जरिये सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी करना है। परियोजना से बड़े सोलर पार्कों की स्थापना में काफी सहायता मिलेगी और वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट के कुल नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में से 100 गीगावाट सौर ऊर्जा की क्षमता स्थापित करने संबंधी सरकारी योजना को आवश्यक सहयोग मिलेगा।

खडग़पुर जंक्शन पर नई इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग प्रणाली शुरू


पश्चिम बंगाल के खडग़पुर स्टेशन पर 19 नवंबर 2017 को भारत की सबसे बड़ी अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली चालू हो गई है। यह ईआई प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में एक है और इसे 423 रूटों के साथ पुरानी रूट रिले इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग प्रणाली के स्थान पर स्थापित किया गया है।

current issues nov. 2017, Dalbeer Bhandari : दलबीर भंडारी

Current issues nov. 2017, Dalbeer Bhandari : दलबीर भंडारी

Important questions for  TGT, PGT, PRT, REET, CTET, UPTET, HTET, RPSC, NET, SLAT, UPSC, UPPSC, NET, SLAT,IAS, IAS, RAS, SSC. Exams.


Dalbeer Bhandari : दलबीर भंडारी


इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय) के लिए भारत के दलवीर भंडारी को पुन: चुना गया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासभा और सुरक्षा परिषद में एक साथ हुए मतदान के बाद न्यायमूर्ति भंडारी को महासभा के 193 मतों में से 183 मत मिले। इसी प्रकार उन्हें सुरक्षा परिषद के सभी 15 वोट हासिल हुए हैं। इस चुनाव में ब्रिटेन ने अपना उम्मीदवार हटा लिया था। उनका कार्यकाल नौ वर्ष का होगा। इस पद के लिए न्यायमूर्ति भंडारी और ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड के बीच कड़ा मुकाबला था।

IMBX आईएमबीएएक्स :- 

भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास-2017 (आईएमबीएएक्स -२017) मेघालय की राजधानी शिलांग से 30 किमी दूर उमरोई में भारतीय सेना के संयुक्त प्रशिक्षण नोड में शुरू हुआ है। इस अभ्यास का उद्देश्य म्यांमार सेना को विभिन्न संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों और कार्यों के लिए प्रशिक्षण देना है ताकि वह भी महाभियान में हिस्सा ले सके। यह दोनों पड़ोसी देशों के सैनिकों का पहला संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है।

विश्व मात्स्यिकी दिवस

विश्व में 21 नवंबर 2017 को विश्व मत्स्य दिवस मनाया गया। इस वर्ष इस दिवस का विषय "2022 का है सपना, किसान की आय हो दुगुना -संकल्प से सिद्धि" रखा गया। भारत में विश्व मात्स्यिकी दिवस का आयोजन लगातार चार वर्षों से हो रहा है।
इस वर्ष पशुपालन, डेयरी एवं मात्स्यिकी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दिनांक 21 नवम्बर 2017 को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र (एन.ए.एस.सी.) काम्प्लेक्स, पूसा रोड, नई दिल्ली में इसका आयोजन किया गया।
21 नवम्बर 1997 को, 18 देशों के मत्स्य कृषकों और मत्स्य कर्मकारों के विश्व मंच का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यरत मछुआरों और मछुआरिनों की बैठक नई दिल्ली में हुई थी। उस बैठक में धारणीय मत्स्य-आखेट के प्रयोगों और नीतियों के एक वैश्विक जनादेश की वकालत करते हुए विश्व मात्स्यिकी मंच (डब्ल्यू.एफ.एफ.) की स्थापना की गई। इसी उपलक्ष्य में 21 नवम्बर को पूरे विश्व में विश्व मात्स्यिकी दिवस मनाया जाता है।

डायबिटीज के रोगियों के लिए स्पेशल चावल


सीसीएमबी-आईआईआरआर ने कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स चावल के लिए करार किया
हैदराबाद स्थित सेण्टर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) ने भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआईआरआर) के साथ मिलकर कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला एक बेहतर साबा मसूरी (आईएसएम) किस्म का चावल विकसित किया है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले चावल मधुमेह वाले लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है। नई किस्म बैक्टीरिया हानि की भी प्रतिरोधी है। आईएसएम का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50.99 के साथ अन्य किस्मों की तुलना में सबसे कम है।

तटीय सुरक्षा अभ्यास सागर कवच शुरू

केरल और लक्षद्वीप द्वीप समूह के लिए तीन दिन का तटीय सुरक्षा अभ्यास सागर कवच 21 नवंबर 2017 से शुरू हुआ। यह अभ्यास हर छह महीने में होता है । इसका उद्देश्य तटीय सुरक्षा तंत्र का आकलन करना और संचालन प्रक्रिया की पुष्टि करना है। इस अभ्यास में आतंकवादी हमले की स्थिति में भाग लेने वाले संगठन की तैयारियों का आकलन करने के लिए आतंकवादी घुसपैठ की मॉक ड्रिल और इसकी रोकथाम शामिल होगी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रिय रंजन दासमुंशी का निधन

चुनावी हलचल के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी का निधन हो गया है। वह पिछले नौ साल से कोमा में थे। उनका जन्म 13 नवंबर 1945 को हुआ था। वह पहली बार वर्ष 1971 में दक्षिणी कोलकाता लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। वर्ष 1985 में उन्हें पहली बार राजीव गांधी मंत्रिमंडल में मंत्रिपद सौंपा गया था।

Shrimad Bhagvat geeta and Important Questions : श्रीमद् भागवत गीता

Shrimad Bhagvat geeta and Important Questions :  श्रीमद् भागवत गीता 

Important questions for Sanskrit TGT, PGT, PRT, REET, CTET, UPTET, HTET, RPSC, NET, SLAT, UPSC, UPPSC, NET, SLAT,IAS, IAS, RAS, SSC. Exams.


श्रीमद् भागवत गीता से संबंधित प्रमुख प्रश्न

-गीता महाभारत का ही अंग है और भीष्म पर्व से ली गई है। भीष्म पर्व गीता का छठां पर्व है।
-भीष्म पर्व में गीता 25वें से 42वें अध्याय तक वर्णित है।
-गीता की रचना महर्षि वेदव्यास ने ही की है। क्योंकि ये ही महाभारत के रचयिता भी हैं।
-गाती में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।
-दार्शनिक श्री अरविन्दो ने गीता को महासंगीत कहा है।
-मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है।

गीता के अध्याय और उनमें श्लोकों की संख्या

1 अर्जुन विषाद योग         -47
2 सांख्य योग                -72
3 कर्म योग                  -43
4 ज्ञान कर्म सन्यास योग        -42
5 कर्म सन्यास योग      -29
6 आत्मसंयम योग    -47
7 ज्ञानविज्ञान योग   -30
8 अक्षरब्रह्म योग    -38
9 राजविद्याराजगुह्ययोग   -34
10 विभूति योग    -42
11 विश्वरूप दर्शन योग   -55
12 भक्ति योग   -20
13 क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग   -34
14 गुणत्रय विभाग योग   -27
15 पुरुषोत्तम योग  -20
16 दैवासुरसम्पद्विभागयोग  -24
17 श्रद्धात्रय विभाग योग  -28
18 मोक्ष सन्यास योग  - 78

गाती के प्राचीन भाष्यकार

1 शंकराचार्य का अद्वैतपरक भाष्य:- यह ज्ञान योग से संबंधित है।
2 रामानुजाचार्य-विशिष्टाद्वैत भाष्य
3 मधवाचार्य- द्वैतपरक भाष्य
4 निम्बार्काचार्य- द्वैताद्वैतपरक भाष्य
5 वल्लभाचार्य- शुद्धाद्वैत भाष्य
( 2 से 5 तक ये चारों भक्तियोग से संबंधित हैं )
6 चैतन्य महाप्रभु :- अचिन्त्यभेदाभेदवादपरक भाष्य

योग त्रयी

1 ज्ञान योग
2 भक्ति योग
3 कर्मयोग

गुण त्रयी
1 सत्व :- श्वेत
2 रजस :- लाल
3 तमस :- काला

गीता में प्रयुक्त प्रमुख शंख और शंख वादक

योद्धा -शंख का नाम

अर्जुन - देवदत्त
भीम - पौण्ड्र
नकुल - सुघोष
कृष्ण - पांचजन्य
युधिश्ठिर - अनन्तविजय
सहदेव - मणिपुष्पक

-बाल गंगाधर तिलक कर्मयोग पर जोर देते थे।
-शंकराचार्य ज्ञान योग पर जोर देते थे।
-रामानुजाचार्य, मधवाचार्य, निम्बार्काचार्य, वल्लभाचार्य भक्ति योग पर जोर देते थे।
-महात्मागांधी अनासक्ति योग पर जोर देते थे।
-ज्ञानेश्वर पातंजलयोग पर जोर देते थे।



Sanskrit Dhatu and there difference : सकर्मक, अकर्मक, परस्मैपदी, आत्मनेपदी और उभयपदी धातुओं की पहचान

Sanskrit Dhatu and their difference:  सकर्मक, अकर्मक, परस्मैपदी, आत्मनेपदी और उभयपदी  धातुओं की पहचान

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जैसा कि संस्कृत के विद्यार्थी जानते हैं कि धातुएं तीन प्रकार की होती हैं।

1आत्मने पदी
2परस्मै पदी
3 उभय पदी।

लेकिन इनकी पहचान के बिना हम यह अंतर नहीं कर पाते कि कौन सी धातु परस्मैपदी है और कौन सी आत्मने पदी और कौनसी उभयपदी।

ऐसे में हम धातु रूप बनाने में परेशानी महसूस करते हैं। इस अंतर को समझने को आप इस प्रकार समझ सकते हैं।

आत्मने पदी धातुएं : 

जहां क वर्ग के अंतिम अक्षर की इत्संज्ञा हो तथा जहां क्रियाफल की प्राप्ति स्वयं को हो वहां आत्मने पदी धातु होती है।
कर्मवाच्य और भाववाच्य में सभी धातुएं आत्मनेपदी होती हैं।
इनमें त, आताम, झ आदि प्रत्यय लगते हैं।

परस्मैपदी : 

यह कर्ता अर्थ में होती है और क्रियाफल की प्राप्ति दूसरों को होती है। यदि भाव वाच्य  या कर्मवाच्य में होगी तो आत्मने पदी होगी।

इसमें तिप, तस, झि प्रत्यय लगते हैं।
आत्मने पदी के अलावा सभी धातुएं परस्मैपदी होती हैं। इसलिए आत्मने पदी पर अधिक ध्यान देना होता है। ताकि परस्मैपदी अपने आप याद हो जाएं।

उभयपदी धातुएं : 

उभयपदी धातुएं वे होती हैं जहां च वर्ग के अंतिम अक्षर की इत्संज्ञा होती है।

इसी प्रकार सकर्मक और अकर्मक धातुओं का अंतर समझना भी आवश्यक है।


सकर्मक धातुएं : 

जहां धातुओं से पहले कर्म संभव हो। अर्थात् जहां को लगे वहां सकर्मक धातु होगी।
जैसे : - स: ग्रंथं पठति ।

इसका अर्थ होगा वह ग्रंथ को पढ़ता है। अत: यह सकर्मक धातु है।

अकर्मक धातुएं :

जहां धातुओं से पहले कर्म संभव नहीं होता। अथवा को नहीं लगता। वह अकर्मक धातुएं होती हैं।
जैसे :- स: शेते ।

इसका अर्थ होगा वह सोता है। यहां को नहीं लगता । को लगाने पर अटपटा लगता है। अत: यहां अकर्मक धातु होगी।

What is ABC Weapons : एबीसी वेपन्स क्या है ?

What is 'ABC'  Weapons : एबीसी वेपन्स क्या है ?

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'ABC' वेपन्स का अर्थ ऐसे विनाशकारी हथियारों से है जिनसे संपूर्ण मानवता को खतरा है। एबीसी वेपन्स में (A-Atomic, B-Bio-logical, C-Chimical ) परमाण, जीवाणु और रासायनिक हथियार शामिल होते हैं। जीवाणु और रासायनिक हथियारों पर रोक लगाने का पहला प्रयास 1925 में जिनेवा प्रोटोकॉल द्वारा किया गया था।

ई-अधिशासन क्या है ?


विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार ई-अधिशासन का अर्थ है सरकारी एजेंसियों द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करना। इसमें व्यापक क्षेत्र में नेटवर्क, इंटरनेट, मोबाइल और कंप्यूटर आदि शामिल हैं, जिनमें नागरिक व्यवसाय और सरकार के मध्य संबंधों को परिवर्तित करने की क्षमता होती है और जिनसे विभिन्न लक्ष्यों की पूर्ति की जा सकती है।
ई-अधिशासन का लक्ष्य नागरिक-प्रशासन के मध्य परस्पर क्रिया सुधारने, लागत घटाने राजस्व सृजन करना और पारदर्शिता लाना है।
 
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